मैं तुम्हें तुम्हारे साथ से पहचानता हूं
वो साथ जो मुझे जीवंत कर देता है
जैसे किसी बंद कमरे को ज़िंदा कर
जाता है उसके किवाड़ का खुलना।
वो साथ जो मुझे जीवंत कर देता है
जैसे किसी बंद कमरे को ज़िंदा कर
जाता है उसके किवाड़ का खुलना।
अब हमेशा ही यूं हो कि जो दरवाज़ा
खुले और कोई अंदर आ ही सके, ये
तो मुमकिन नहीं है देखो, और न
इसमें कमी दस्तकगार की है।
क्या रोशनी की सेंध का एक धागा
काफ़ी नहीं है, उस चौखट बंधे कमरे
के वजूद को साबित करने के लिए?